कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को मासिक धर्म छुट्टी नीति को ‘कड़ाई से और सही ढंग से’ लागू करने का निर्देश दिया

Karnataka High Court directs State government to ‘strictly and faithfully’ implement menstrual leave policy

Bengaluru, Karnataka

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को मासिक धर्म छुट्टी नीति को ‘‘कड़ाई से और सही ढंग से’’ लागू करने का सख्त निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि प्रस्तावित कर्नाटक मासिक धर्म छुट्टी और स्वच्छता विधेयक, 2025 के लागू होने के बाद राज्य सरकार को बिना किसी अनावश्यक देरी के उपयुक्त नियम बनाने होंगे, ताकि इस कानून का पूर्ण और सार्थक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।

यह आदेश उन महिलाओं के अधिकारों को मान्यता देने के दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो मासिक धर्म के दौरान राहत पाने के हकदार हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह नीति केवल औपचारिकता नहीं होंगी, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी उपायों को लागू किया जाएगा।

कोर्ट की टिप्पणी में कहा गया है, “राज्य सरकार को जल्द से जल्द नियमावली बनानी होगी, जिससे मासिक धर्म छुट्टी का प्रावधान सही और पूरी तरह से लागू हो सके। यह पहल महिलाओं के कामकाजी जीवन को संतुलित बनाने में मदद करेगी और लैंगिक समानता के प्रति सरकार के संकल्प को दर्शाएगी।”

विधेयक के अंतर्गत महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान छुट्टी लेने का अधिकार दिया गया है, ताकि वे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकें तथा कामकाजी माहौल में कोई भी असुविधा न हो। इसके अतिरिक्त, स्वच्छता की बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए भी विशेष नियम बनाए जाएंगे।

कर्नाटक सरकार की ओर से इस मामले में सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गई है, और अधिकारियों ने कहा है कि जल्द ही नियमावली तैयार कर इसे सुपुर्द किया जाएगा। यह कदम राज्य में महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार और कार्यस्थल पर बराबरी की भावना को बढ़ावा देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति के लागू होने से महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर जागरूकता बढ़ेगी और समाज में मासिक धर्म के विषय में बनी भ्रांतियों को दूर करने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण स्थापित करेगा कि किस प्रकार महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकता है।

न्यायालय के निर्देश के बाद कर्नाटक सरकार की यह पहल समकालीन सामाजिक और शैक्षिक प्रगति के अनुरूप प्रशंसनीय कदम है, जो देशभर में महिला सशक्तिकरण के नए आयाम खोलेगी। महिलाएं अब अपने कार्यस्थल पर सुरक्षित, समर्थ और सम्मानजनक माहौल का अनुभव कर सकेंगी।