बच्चों में आईबीएस: लक्षण, कारण और कब लें डॉक्टर की मदद

IBS in children: symptoms, triggers, and when to seek medical help

नई दिल्ली, भारत – आधुनिक युग में बच्चों की जीवनशैली में बहुत बदलाव आया है, खासकर पिछले एक दशक में। खान-पान की आदतों से लेकर रोजमर्रा की गतिविधियों तक, सब कुछ प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में इर्रिटेबल बॉवल सिंड्रोम (IBS) के मामलों में वृद्धि का एक मुख्य कारण यही बदलाव है।

IBS एक सामान्य लेकिन जटिल पाचन समस्या है जो बच्चों के जीवन को प्रभावित कर सकती है। इसमें पेट दर्द, ऐंठन, दस्त या कब्ज जैसी समस्याएं होती हैं। हाल के अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि शारीरिक गतिविधियों में कमी और बढ़ता तनाव बच्चों में IBS की संभावना को बढ़ाता है।

IBS के मुख्य लक्षण

  • पेट में निरंतर या बार-बार दर्द
  • गैस की समस्या और सूजन
  • दस्त या कब्ज जैसे मल त्याग की समस्या
  • भूख में कमी और थकान महसूस होना

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। जल्दी निदान और सही उपचार से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

कारण और ट्रिगर

विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों में IBS के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें भोजन की आदतों में बदलाव, जैविक तनाव, आनुवंशिक कारण, और पेट के अंदर इन्फेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा, मोबाइल, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अधिकता से शारीरिक गतिविधियों में कमी भी एक बड़ा कारण है।

परिवारों को चाहिए कि वे बच्चों के भोजन में पौष्टिकता बनाए रखें और नियमित व्यायाम को प्रोत्साहित करें। साथ ही, बच्चों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए परामर्श और खुली बातचीत भी महत्वपूर्ण है।

कब लें डॉक्टर की मदद?

यदि बच्चे को बार-बार पेट दर्द हो रहा हो, भोजन करने के बाद पेट खराब हो रहा हो, या बच्चा सामान्य रूप से सक्रिय न हो, तो यह संकेत हो सकते हैं कि IBS की समस्या हो सकती है। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टर से सम्पर्क करना आवश्यक होता है। डॉक्टर स्थिति का उचित निदान कर सही उपचार शुरू कर सकते हैं जिसमें दवा, आहार पर नियंत्रण और मानसिक सहायता शामिल हो सकती है।

अंत में कहा जा सकता है कि बच्चों का सही पोषण, नियमित गतिविधि और तनाव मुक्त माहौल ही IBS जैसी समस्याओं से लड़ने की ताकत देता है। परिवारों को सावधानी बरतते हुए समय-समय पर अपने बच्चों की सेहत पर ध्यान देना चाहिए ताकि वे स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकें।