एक और उड़ान की प्रतीक्षा: उत्तर प्रदेश के रुके हुए हवाई अड्डों से निपटना
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: पिछले कुछ वर्षों में, उत्तर प्रदेश में द्वितीय और तृतीय श्रेणी के कई शहरों में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए कई हवाई अड्डों का उद्घाटन किया गया। इसका उद्देश्य था प्रदेश के दूर-दराज़ और छोटे शहरों को मुख्य हवाई मार्गों से जोड़ना और आर्थिक विकास को गति प्रदान करना। लेकिन कई हवाई अड्डों की संचालन प्रक्रिया शुरू होने के कुछ ही हफ्तों बाद रोक दी गई, जिससे इसकी योजना और व्यवहार्यता पर सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रवास के पीछे व्यापक अध्ययन की कमी और दीर्घकालीन योजना की कमी प्रमुख कारण हैं। कई बार केवल बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया, लेकिन सेवाओं को स्थायी और व्यावहारिक बनाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए। इसमें एयरलाइंस की भागीदारी, यात्री संख्या का अनुमान और स्थानीय आर्थिक विकास मॉडल का सही आकलन शामिल है।
सरकार ने क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी योजना (RCS) के तहत इन एयरपोर्ट्स का निर्माण किया ताकि छोटे शहरों को हाईवे यातायात से अलग करके हवाई मार्ग से जोड़ा जा सके। लेकिन कई एयरपोर्ट की कम यात्री सुविधा और उड़ान सेवाओं की अनियमितता ने यात्रियों का विश्वास खो दिया है। इस वजह से एयरलाइंस ने कुछ मार्गों से परिचालन वापस ले लिया।
राज्य के परिवहन एवं हवाई सेवा विशेषज्ञ कहते हैं कि हवाई अड्डों का निर्माण स्वाभाविक है, लेकिन उसे बरकरार रखने के लिए निरंतर निवेश, उचित मार्केटिंग और शुरुआती चरणों में स्थानीय एजेंसियों का सहयोग जरूरी है। साथ ही, समय समय पर मांग के आधार पर सेवाओं का अनुकूलन आवश्यक है ताकि कोई एयरपोर्ट खाली न पड़े।
प्रदेश सरकार ने भी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए, पुनः संचालन शुरू करने के लिए कुछ एयरलाइंस से बातचीत शुरू कर दी है और स्थानीय व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही यात्रियों को भी इन नए विकल्पों को अपनाने और प्रयोग करने की आवश्यकता होगी ताकि ये हवाई अड्डे लाभकारी साबित हों।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय विमानन को बढ़ावा देने की यह पहल महत्त्वपूर्ण है, लेकिन सफल होने के लिए इसके पीछे की रणनीति और दीर्घकालीन योजना का कड़ाई से पालन आवश्यक है। रुके हुए हवाई अड्डों को पुनः गतिविधिमान बनाए बिना प्रदेश का वृहद विकास अधूरा रह सकता है।
