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Bengaluru, Karnataka
पुनः रंगभूमि पर प्रस्तुत “योगी वर्सेस भोगी” नाटक ने दर्शकों का मन मोह लिया है। यह नाटक सातवीं सदी की संस्कृत नाट्यकला “भगवदज्जुकम्” का अंग्रेज़ी संस्करण है, जिसे पुनः थिएटर ने प्रस्तुत किया है और जिसका निर्देशन प्रसिद्ध नाटककार महेश दत्तानी ने किया है। इस प्रदर्शन में हास्य, दर्शन, लैंगिकता और यक्षगान जैसे पारंपरिक नाट्यकला के तत्त्वों का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है।
“योगी वर्सेस भोगी” का मूल संस्कृत नाटक “भगवदज्जुकम्” एक पारंपरिक हास्य नाटक है, जिसमें बुध्दिमत्ता और दर्शन की गूढ़ता को मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। पुनः थिएटर द्वारा इसका अंग्रेजी रूपांतरण करते हुए न केवल भाषा में परिवर्तन किया गया है, बल्कि इसमें सामाजिक और समकालीन मुद्दों को भी बड़ी सूझबूझ से शामिल किया गया है।
महेश दत्तानी ने इस नाटक का निर्देशन करते हुए यक्षगान की पारंपरिक शैली को आधुनिक रंग दिये हैं। यक्षगान दक्षिण भारत की एक लोकनाट्य शैली है, जिसमें नाटकीयता और नृत्य का अद्भुत संगम होता है। इस नाटक में यक्षगान के रंगारंग दृश्यों के माध्यम से हास्य और दर्शन दोनों को सहजता से जोड़ा गया है। यह संयोजन देश-विदेश के दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय साबित हो रहा है।
नाटक में लैंगिकता के मुद्दों को भी बखूबी उभारने की कोशिश की गई है, जिससे यह न केवल एक मनोरंजक प्रस्तुति है, बल्कि एक चिंतनात्मक मंच भी है। पुनः थिएटर की टीम ने इस प्रस्तुति को अत्यंत पारदर्शी और सजीव बनाकर दर्शकों के समक्ष एक ऐसा मंच रखा है जो पुरानी संस्कृत परंपरा और समकालीन सामाजिक विमर्श के बीच सेतु का काम करता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित दर्शकों ने नाटक की प्रशंसा की और कहा कि “योगी वर्सेस भोगी” ने उन्हें यक्षगान की समृद्ध विरासत से परिचित कराने के साथ-साथ आज के समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी गहरा प्रभाव डाला। महेश दत्तानी की कुशल निर्देशन कला ने इस नाटक को न केवल मनोरंजन बल्कि ज्ञानवर्धक बना दिया है।
आगे की तिथियों में यह नाटक कई अन्य राज्यों और शहरों में भी प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोग इस अनूठी प्रस्तुति का लाभ उठा सकेंगे। यह नाटक न केवल संस्कृत नाट्य परंपरा का संरक्षण करता है, बल्कि उसे समकालीन संदर्भों में भी प्रासंगिक बनाता है।
इस प्रकार, “योगी वर्सेस भोगी” पुनः थिएटर की एक सफल रचना है, जिसने दर्शकों को पारंपरिक और आधुनिक के संगम की सुंदरता का अनुभव कराया है।
