भारत को सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता

‘India needs to expand the quantum of community health workers’

नई दिल्ली, भारत

देश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए ASHA कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ASHA जैसे महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, प्रत्येक गांव में एक पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता, जिसे वे असोक नाम देना चाहते हैं, की भी जरूरत है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की समग्र पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सके।

गांवों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने में ASHA कार्यकर्ताओं ने अभूतपूर्व योगदान दिया है। मगर, सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं के कारण पुरुष रोगियों तक संदेश पहुँचाने में सीमाएं आई हैं। इस संदर्भ में, एक पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता का होना ज़रूरी माना जा रहा है जो पुरुषों के स्वास्थ्य मुद्दों को बेहतर तरीके से समझ सके और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाने में सहायक हो।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संख्या में बढ़ोतरी से ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र मजबूत होगा। देश में कई जगहों पर स्वास्थ्य कार्यकर्ता की कमी है, जिससे प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रभावित हो रही है। असोक जैसे पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता इस कमी को पूरा करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

सरकारी योजनाओं के तहत ASHA कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है, ताकि वे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से लेकर टीकाकरण, स्वच्छता और रोग नियंत्रण तक विभिन्न कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। अब विशेषज्ञ इस मॉडल को और प्रभावी बनाने के लिए पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की तैनाती का प्रस्ताव रख रहे हैं जिससे समुदाय के स्वास्थ्य मुद्दों का व्यापक समाधान मिल सके।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाना स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को व्यापक बनाएगा। साथ ही, पुरुषों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए भी नई रणनीतियां अपनाई जाएंगी। यह परिवर्तन ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

अंततः, किसी भी गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की समग्र गुणवत्ता तभी सुनिश्चित हो पाएगी जब सभी वर्गों के लिए समान रूप से स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपलब्ध हों। ASHA और असोक जैसे कार्यकर्ताओं की संयुक्त भूमिका ग्रामीण स्वास्थ्य इकाइयों को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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