दस वर्षों में सत्ता में रहने के बावजूद AGP की स्थिर गिरावट को शीर्षक संख्या छुपा रही है
गुवाहाटी, असम। असम में भाजपा के जूनियर सहयोगी, असाम गण परिषद (AGP) ने लोकसभा चुनाव के लिए पिछली बार जितने सीटों पर चुनाव लड़ा, उतनी ही इस बार भी लड़ने का अवसर प्राप्त किया है। हालांकि, गहराई से विश्लेषण करने पर यह बात सामने आती है कि पार्टी धीरे-धीरे अपनी जमीन खो रही है।
AGP को इस बार 14 विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ाने के लिए भाजपा ने राजी किया है, जो पिछले चुनाव के समान संख्या है। बावजूद इसके, हालिया सामाजिक-राजनीतिक तत्वों और मतदाता पैटर्न की समीक्षा से पता चलता है कि पार्टी की लोकप्रियता और जनसमर्थन में गिरावट आ रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व की भूमिका ने पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित किया है।
पिछले दशक में AGP ने असम की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन लगातार सत्ता में आने के बावजूद उसकी स्थिति मजबूत नहीं हो पाई है। इसके उलट, अन्य विरोधी दलों ने बेहतर रणनीतियों और व्यापक जनसमर्थन से अपना आधार बढ़ाया है। पार्टी की इस स्थिति को भाजपा के गठबंधन में संतुलन बनाए रखने के नजरिए से देखा जा रहा है, लेकिन जमीन पर असंतोष भी बढ़ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AGP को अपने पारंपरिक समर्थकों के बीच विश्वास बहाल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। स्थानीय विकास, रोजगार, और सांस्कृतिक मुद्दों को प्रमुखता देकर ही वह मतदाताओं को फिर से आकर्षित कर सकेगी। चुनाव के परिणाम यह संकेत देंगे कि क्या AGP की यह गिरावट अस्थायी है या लंबी अवधि की चुनौती।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय नेताओं के अनुसार, असम के मतदाता अब अधिक जागरूक और बदलाव के इच्छुक हैं। भाजपा के सहयोगी के रूप में AGP को अपने द्वन्द्वों को सुलझाते हुए जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना होगा। केवल संख्या नहीं बल्कि पार्टी की साख और काम की पहचान बनाना जरूरी है।
