आर्ट थेरेपी मानसिक स्वास्थ्य समर्थन का विस्तार कर रही है: थेरेपिस्ट
नई दिल्ली, भारत – मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आर्ट थेरेपी को तेजी से महत्व दिया जा रहा है। पेशेवर थेरेपिस्टों का कहना है कि कला के माध्यम से उपचार न केवल मानसिक तनाव को कम करने में सहायक है, बल्कि यह उन लोगों के लिए एक सशक्तिकरण का जरिया भी बन गया है जो पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े उपचारों को अपनाने में हिचक महसूस करते हैं।
आर्ट थेरेपी का उद्देश्य व्यक्ति की भावनाओं और मानसिक संघर्षों को कला के जरिए अभिव्यक्त करना है। इससे न केवल उनके अंदर छिपी भावनाओं को समझने में मदद मिलती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के उपचार में भी यह एक प्रभावी माध्यम साबित होता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में इस क्षेत्र की स्वीकार्यता बढ़ी है और कई अस्पताल, क्लीनिक तथा मानसिक स्वास्थ्य संस्थान अब आर्ट थेरेपी को अपनी सेवा में शामिल कर रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में वृद्धि देखी गई है। इस पर ध्यान देते हुए कई गैर-सरकारी संगठन और चिकित्सा विशेषज्ञ आर्ट थेरेपी को एक सुरक्षित और सुलभ विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। थेरेपिस्ट प्रामाणिक अनुभव बताते हैं कि कई मामलों में आर्ट थेरेपी से मरीजों की चिंता, तनाव, डिप्रेशन और PTSD जैसे गंभीर मानसिक विकारों में सुधार हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कला के माध्यम से व्यक्त होने वाले भावनात्मक अनुभव व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को समृद्ध करते हैं। यह न केवल उपचार को सरल बनाता है बल्कि रोगी और चिकित्सक के बीच बेहतर संवाद की भी सुविधा देता है, जिससे उपचार की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
साथ ही, आर्ट थेरेपी में पेंटिंग, ड्राइंग, मूर्तिकला और संगीत जैसे विभिन्न सृजनात्मक गतिविधियाँ शामिल हैं, जो हर उम्र और पृष्ठभूमि के लोगों के लिए उपयुक्त हैं। थेरेपिस्ट भी मानते हैं कि यह विधि न केवल मानसिक स्वास्थ्य के लिए बल्कि सामाजिक समावेशन और भावनात्मक संतुलन के लिए भी कारगर है।
इस क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए कई संस्थान प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं ताकि आर्ट थेरेपी की पहुँच अधिक से अधिक लोगों तक हो सके। सरकार के अलावा निजी क्षेत्र और समाजसेवी संस्थाएं भी इस दिशा में सक्रिय हैं।
इस प्रकार, आर्ट थेरेपी एक नई उमंग के साथ मानसिक स्वास्थ्य समर्थन के क्षेत्र में अपनी भूमिका सिद्ध कर रही है। विशेषज्ञों का मत है कि इसे और अधिक प्रोत्साहित कर देश के व्यापक मानसिक स्वास्थ्य सुधार में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाया जाना चाहिए।
