राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के निष्कर्ष | द हिन्दू की पूर्ण रिपोर्ट
नई दिल्ली, भारत – भारत सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के नवीनतम निष्कर्षों ने देश के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण आकड़ों को उजागर किया है। द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, इस सर्वेक्षण में विभिन्न राज्यों में परिवारों की स्वास्थ्य स्थिति, पोषण, जनसांख्यिकी, और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों का व्यापक अध्ययन किया गया है।
इस सर्वेक्षण में खासतौर पर माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया गया है। सर्वे के आंकड़ों से पता चलता है कि बाल मृत्यु दर में पिछले दौरे की तुलना में कुछ राज्यों में कमी आई है, जबकि कुछ राज्यों में अभी भी सुधार की आवश्यकता है। मातृ मृत्यु दर तथा टीकाकरण के स्तर में भी राज्यों के बीच विविधता देखी गई है।
आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण भारत के कई राज्यों में पोषण स्तर बेहतर है, वहीं पूर्वोत्तर और कुछ उत्तर भारत के राज्यों में कुपोषण की समस्या बनी हुई है। द हिन्दू की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जनसंख्या नियंत्रण उपायों जैसे परिवार नियोजन की जागरूकता एवं उपयोग में भी राज्यों के बीच अंतर स्पष्ट हैं। कुछ राज्यों में परिवार नियोजन के लिए आधुनिक तरीकों का उपयोग बढ़ा है, जबकि अन्य क्षेत्रों में पारंपरिक तरीकों का प्रचलन अधिक है।
इसके अतिरिक्त, महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, प्रसव स्थिति और विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को भी इस सर्वे में शामिल किया गया है। यह सर्वेक्षण नीति निर्माताओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा क्योंकि इससे उन्हें यह समझने में सहायता मिलेगी कि किन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता है और किन नीतिगत कदमों से बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को चाहिए कि वे इन आंकड़ों का उपयोग कर-targeted interventions करें ताकि सभी वर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं सुगम और प्रभावी बन सकें। परिणामत: यह सर्वेक्षण भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के सुधार और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज सिद्ध होगा।
