तिरुपति में ‘गंगम्मा’ जत्रा के अंतिम दिन भारी भीड़ उमड़ी

‘Gangamma’ Jatara attracts heavy crowd on final day in Tirupati

तिरुपति, आंध्र प्रदेश: तिरुपति में भगवान गंगम्मा की जत्रा के अंतिम दिन भारी भीड़ देखी गई। यह त्योहार स्थानीय जनता के बीच गहरी आस्था का प्रतीक है और इसे बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। रविवार को मेला क्षेत्र में आम नागरिक, श्रद्धालु और पर्यटक एक साथ उमड़े, जिससे परिसर में उत्साह का वातावरण बना रहा।

गंगम्मा जत्रा स्थानीय देवी गंगम्मा की पूजा का सबसे बड़ा आयोजन है। इस वर्ष भी कोविड-19 के बाद इसे पूरी भव्यता और प्रतिबंधों के अनुपालन के साथ मनाया गया। स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

विभिन्न पांडालों में देवी गंगम्मा के विशाल पुतले स्थापित किए गए, जहां भक्तों ने मालाएं चढ़ाईं और भजन-कीर्तन किए। त्योहार के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिनमें पारंपरिक नृत्य और संगीत को प्रदर्शित किया गया।

अंतिम दिन, विशेष पूजा और आरती के बाद मेले का समापन हुआ। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस बार की जत्रा पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भीड़ वाली रही, जो इस त्योहार की लोकप्रियता की गवाही है। प्रशासन ने बताया कि भीड़ नियंत्रण के लिए हर जरूरी इंतजाम किए गए थे।

इस जत्रा में आसपास के गांव और शहरों से भी लोग भारी संख्या में पहुंचे। मदर्स और बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था एवं प्राथमिक चिकित्सा सेवा भी उपलब्ध कराई गई थी। अन्नदान और पैदल यात्रियों के लिए विशेष पथ भी बनाए गए थे।

गंगम्मा जत्रा का महत्व न केवल धार्मिक है बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का भी बड़ा स्रोत बनता है, क्योंकि मेले में होने वाली गतिविधियों से व्यापारिक गतिविधियां सक्रिय रहती हैं।

पुलिस एवं प्रशासन ने भी जनता से संयम और नियमों का पालन करने का आह्वान किया ताकि भविष्य में भी यह पर्व सुरक्षित और सफलतापूर्वक मनाया जा सके।

आशा है कि आने वाले वर्षों में गंगम्मा जत्रा और भी भव्यता से मनाया जाएगा और यह परंपरा नए पीढ़ी तक इसी तरह जीवित रहेगी।

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