राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति के अनुसार भारत का 2022 फॉरेंसिक कानून औपनिवेशिक युग के ढांचे से बदलाव है

India’s 2022 forensic law marks shift from colonial-era framework, says National Law University VC

नई दिल्ली, प्रदेश राष्ट्रीय – 25 मई से 30 मई तक आयोजित हो रही अंतरराष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान संघ की 24वीं त्रिवार्षिक सभा में देश-विदेश के फॉरेंसिक विशेषज्ञ, विधि के विद्वान और जांचकर्ता एकत्रित हुए। इस सम्मेलन का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में नवीनतम विकासों और चुनौतियों पर चर्चा करना है।

इस आयोजन में उपस्थित विशेषज्ञों ने विभिन्न तकनीकों और विधानों पर विचार-विमर्श किया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावशाली बनाया जा सके। फॉरेंसिक विज्ञान犯罪 के समाधान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इस ट्राइएनियल बैठक ने इसके महत्व को फिर से रेखांकित किया।

सम्मेलन के दौरान कई तकनीकी कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं, जिनसे नवोदित और अनुभवी शोधकर्ताओं को अपने ज्ञान को बढ़ाने का अवसर मिला। साथ ही, मेंबर देशों के बीच सहयोग के नए मार्ग खोले गए, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचना और संसाधनों का आदान-प्रदान आसान होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मेलन न केवल फॉरेंसिक क्षेत्र को मजबूत बनाते हैं, बल्कि न्याय प्रणाली में भी विश्वास बहाल करते हैं। न्यायिक जांचों में फॉरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, और विशेषज्ञ इस क्षेत्र में निरंतर नवीनता लाने पर जोर दे रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान संघ की यह त्रिवार्षिक बैठक देश के लिए गर्व का विषय है और वैश्विक स्तर पर भारत की गरिमा को बढ़ाती है। यह आयोजन फॉरेंसिक विज्ञान के प्रति जागरूकता फैलाने और उसके अनुप्रयोग को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगा।

Source