ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी: बेइрут पर हमला युद्ध की पूरी बहाली को जन्म देगा

Iran's Foreign Minister warns any attack on Beirut will trigger 'full-scale resumption of war'

तेहरान, ईरान। ईरान ने पश्चिम एशिया में बढ़ती स्थिरता संकट के बीच एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी भी समझौते में लेबनान में चल रहे संघर्ष को भी रोकना अनिवार्य है। ईरान का यह रुख तब सामने आया है जब उसके सहयोगी संगठन हिज़्बुल्लाह ने 2 मार्च से बेइрут की स्थिति पर सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावाद ज़रीफ़ ने हाल ही में एक पत्रकार वार्ता में कहा कि “यदि बेइрут पर किसी भी प्रकार का हमला होता है, तो यह पूरी तरह से युद्ध के फिर से छिड़ने का कारण बनेगा।” उनका यह बयान क्षेत्र की नाजुक स्थिति को दर्शाता है जहां छोटे से उत्पात भी बड़े युद्ध की चिंगारी बन सकता है।

ज़रीफ़ ने यह भी जोर दिया कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति तभी संभव है जब लेबनान में सभी लड़ाइयां बंद हों और हिज़्बुल्लाह समेत सभी पक्ष अपने संघर्ष को समाप्त करें। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि सभी विवाद संवाद के माध्यम से सुलझें और किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचा जाए।”

पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय गहराई से चिंतित है क्योंकि लगभग दो दशकों से यह क्षेत्र हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। विशेष रूप से लेबनान में गिरती आर्थिक स्थिति और राजनीतिक संकट ने हालात को और जटिल बना दिया है।

हिज़्बुल्लाह, जो कि ईरान समर्थित एक सशस्त्र और राजनीतिक समूह है, ने मार्च की शुरुआत में युद्ध क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ा दी। इससे न केवल स्थानीय संघर्ष तेज हुए, बल्कि क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव भी बढ़ा। ऐसे समय में ईरान के विदेश मंत्री का यह कठोर रुख संघर्ष विराम की दिशा में एक महत्वपूर्ण बयान माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थायित्व कायम करना है तो ईरान जैसे प्रमुख खिलाड़ियों की भूमिका निर्णायक होगी। ईरान की यह मांग कि संघर्ष विराम में लेबनान की लड़ाई को भी शामिल किया जाए, यह दर्शाती है कि भविष्य में क्षेत्रीय शांति के लिए सभी पक्षों को संगठित और समन्वित दृष्टिकोण अपनाना होगा।

इन सबके बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर भी दबाव है कि वे मध्य पूर्व में एक व्यापक और टिकाऊ समाधान निकालें जो सभी राज्यों और संगठनों की चिंताओं का संतुलित समाधान हो। यह तभी संभव होगा जब युद्ध के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सार्थक वार्ता शुरू की जाए।

हालांकि अभी संघर्ष के खतरे कम नहीं हुए हैं, लेकिन ज़रीफ़ के बयान से उम्मीद की किरण दिखाई देती है कि यथार्थवादी और नैतिक दबाव के कारण क्षेत्र में शांति की दिशा में कुछ प्रयास तीव्र हो सकते हैं।

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