राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर पीएम ने कहा: 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण ने भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता को प्रदर्शित किया
जयपुर, राजस्थान
भारत ने 11 और 13 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण रेंज में पांच उन्नत परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किए थे, जिन्हें वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इस ऐतिहासिक आयोजन ने देश को विश्व मानचित्र पर सुरक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में मजबूत स्थिति प्रदान की।
पोखरण में किए गए इन परमाणु परीक्षणों ने यह साबित कर दिया कि भारत अत्याधुनिक परमाणु तकनीक विकसित कर चुका है और अपनी सुरक्षा जरूरतों को आत्मनिर्भर तरीके से पूरा कर सकता है। 1998 के ये परीक्षण केवल शस्त्र विकास का प्रदर्शन नहीं थे, बल्कि देश की वैज्ञानिक प्रतिभा, अनुसंधान एवं विकास की क्षमता और तकनीकी चेतना की पराकाष्ठा को दर्शाते हैं।
राजस्थान के रेगिस्तान में स्थित पोखरण रेंज ऐसे क्षेत्र के रूप में जाना जाता है जहां कठिन मौसम और स्थलाकृतिक परिस्थितियों के बावजूद वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने मिलकर एक उच्च स्तरीय तकनीकी उपलब्धि हासिल की। इस परियोजना में भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव एवं बाद में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में यह निर्णय लिया गया था कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं रणनीतिक शांति बनाए रखने के लिए परमाणु परीक्षण बेहद आवश्यक हैं। परीक्षणों के बाद भारत ने पूरी दुनिया को अपनी प्रतिबद्धता बताते हुए एक मजबूत और शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में अपनी छवि स्थापित की।
1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद से भारत ने अपने परमाणु कार्यक्रम को काफी आगे बढ़ाया है और विश्व के उन चुनिदा देशों में शामिल हो गया है जो परमाणु हथियारों की क्षमताओं के साथ विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार भी हैं। इस कड़ी में नवाचार, सुरक्षा और अनुसंधान की अहम भूमिका रही है, जिसने भारत को तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना दिया है।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर यह याद करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि विज्ञान और तकनीक ही राष्ट्र के विकास और सुरक्षा की कुंजी हैं। 1998 के पोखरण परीक्षणों ने यह साबित कर दिया कि भारत अपने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के योगदान से हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है। आज भी यह कार्यक्रम देश की तकनीकी उन्नति और सुरक्षा नीति की मिसाल के रूप में याद किया जाता है।
अंततः, पोखरण परमाणु परीक्षण न केवल एक सैन्य उपलब्धि थे, बल्कि यह भारत के वैज्ञानिक समुदाय के लिए गर्व का विषय हैं, जिन्होंने कठिनाइयों के बावजूद देश को शक्तिशाली और विकसित राष्ट्र बनाने में अपना योगदान दिया।
