पश्चिम बंगाल में त्रिणमूल पार्टी कार्यालय और क्लॉक टॉवर ध्वस्त
कोलकाता, पश्चिम बंगाल: दक्षिण कोलकाता के गड़िया इलाके में एक हरित क्लॉक टॉवर कोलकाता नगर निगम की टीम द्वारा ध्वस्त कर दिया गया है। वहीं, उत्तरी 24 परगना जिले के नैहाटी क्षेत्र में एक अवैध त्रिणमूल पार्टी कार्यालय को मिटा दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह पार्टी कार्यालय रेलवे के अधीनस्थ जमीन पर बनाया गया था।
नगर निगम की तरफ से रविवार को जारी की गई आधिकारिक जानकारी में बताया गया कि कोलकाता के गड़िया इलाके में स्थित क्लॉक टॉवर को सुरक्षा कारणों और अवैध निर्माण होने की वजह से ढहा दिया गया। यह क्लॉक टॉवर पुराना और मरम्मत के अभाव में खतरनाक स्थिति में था, जिसके कारण इसे हटाना अनिवार्य हो गया था।
वहीं, नैहाटी में त्रिणमूल कांग्रेस के एक अवैध कार्यालय को भी स्थानीय प्रशासन द्वारा जमीन के कानूनी दस्तावेजों की जांच के बाद हटाया गया। अधिकारियों ने बताया कि वह जमीन भारतीय रेलवे के अंतर्गत आती है और पार्टी कार्यालय का निर्माण बिना अनुमति के किया गया था।
नैहाटी के कलेक्टर कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस जारी करने के बाद भी जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो प्रशासन को जबरन यह निर्माण गिराना पड़ा। साथ ही पुलिस द्वारा स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कई लोगों ने प्रशासन की यह कार्रवाई सही और कानूनी बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक दांव के तौर पर भी माना। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि ये सभी कदम नियमों के तहत लिए गए हैं और किसी भी पार्टी विशेष को टारगेट नहीं किया गया है।
पश्चिम बंगाल में अक्सर अवैध निर्माण और भूमि विवादों को लेकर प्रशासन को कड़ा रुख अपनाते देखा गया है। इस बार भी प्रशासन ने साफ किया है कि कानून सबके लिए बराबर है और कोई भी अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस घटना के बाद त्रिणमूल कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वे प्रशासन के आदेशों का सम्मान करते हैं, लेकिन पार्टी कार्यालय के ध्वंस को राजनीतिक प्रताडना तक सीमित करने के प्रयासों को वे खारिज करते हैं। उन्होंने मामले की पूरी जांच की मांग भी की है।
इस प्रकार, कोलकाता के गड़िया इलाके में क्लॉक टॉवर के साथ-साथ नैहाटी में अवैध पार्टी कार्यालय के ध्वस्त होने की यह कार्रवाई प्रशासन द्वारा कानून और व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में उठाया गया एक कदम है। उम्मीद है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं कम होंगी और सभी निर्माण कानूनी मंजूरी के अधीन रहेंगे।
