डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि संदिग्ध इबोला मौतें 220 पहुंच गईं और ‘महामारी हमारी गति से आगे बढ़ रही है’
नयी दिल्ली, भारत – विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉ. टेडरोस अधनोम घेब्रीयसस ने हाल ही में कहा है कि इबोला वायरस से संदिग्ध मौतों की संख्या 220 तक पहुंच चुकी है और इस महामारी का प्रसार अब हमारी पकड़ से बाहर होता जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि हम इस वायरस के फैलाव को रोकने के लिए तेजी से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल महामारी हमारी तुलना में तेज गति से बढ़ रही है।
डॉ. टेडरोस ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) को संक्रमण का सबसे बड़ा केंद्र बताया और साथ ही उस क्षेत्र की सीमाओं से लगे देशों से तुरंत कठोर और प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया ताकि इस जानलेवा वायरस को और आगे फैलने से रोका जा सके। उन्होंने कहा, “हम आपातकालीन स्तर पर अपने ऑपरेशन्स बढ़ा रहे हैं, लेकिन महामारी की गति हमारे प्रयासों से आगे निकल रही है। हमें इलाके में अधिक संसाधनों की आवश्यकता है।”
इबोला वायरस संक्रमण के कारण मौतों की संख्या को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जताई है क्योंकि इस वायरस का संक्रमण अत्यंत तेज़ी से फैलता है और यह घातक भी होता है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में फैल रही यह महामारी इस साल अब तक सबसे बड़े संकट के रूप में उभरी है। WHO ने स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से मिलकर त्वरित और समन्वित कार्रवाई की जरूरत पर बल दिया है।
WHO प्रमुख ने बताया कि वायरस से प्रभावित क्षेत्र में निगरानी, परीक्षण और वैक्सीन वितरण को बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। लेकिन सीमावर्ती देशों के स्वास्थ्य ढांचे में सुधार न होने से संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने उन देशों को सतर्क रहने व स्वास्थ्य विभाग को तैयार रहने का निर्देश दिया है ताकि वे महामारी के प्रसार को रोक सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी जरूरी है। जागरूकता अभियानों और स्वच्छता उपायों को बढ़ावा देना संक्रमण को रोकने में प्रभावी साबित होगा। WHO और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थान मिलकर इस बीमारी से लड़ने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएंगे।
डॉ. टेडरोस ने स्पष्ट कहा, “यदि हम समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाएंगे तो यह महामारी और अधिक तबाही मचा सकती है। यह वैश्विक स्वास्थ्य संकट की दिशा में बड़ा खतरा बना हुआ है।” उन्होंने सभी देशों से सहयोग करते हुए इस खतरे को समाप्त करने का आह्वान किया।
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के अलावा, क्षेत्रीय देशों, जैसे कि रवांडा, युगांडा और दक्षिण सूडान में भी सतर्कता बढ़ाई जा रही है। WHO की टीम कुछ महीनों से इन देशों में गठित फार्मास्यूटिकल और स्वास्थ्य मॉनिटरिंग इकाइयों के ऊपर कार्य कर रही है।
इस संकट के बीच, स्थानीय निवासी भी संक्रमण के बढ़ते खतरे को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने सरकार से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है। विशेषज्ञों का भी कहना है कि जारी कार्रवाई से महामारी की स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है यदि सभी स्तरों पर समयबद्ध और ठोस कदम उठाए जाएं।
