क्यों 43% भारतीय छात्र विदेश में शिक्षा योजनाएं छोड़ रहे हैं; और बाकी कहाँ जा रहे हैं

Why 43% of Indian students are dropping overseas education plans; and where the rest are going

नई दिल्ली, भारत

हाल ही की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 43% भारतीय छात्र अब अपनी विदेश में शिक्षा प्राप्त करने की योजनाओं से पीछे हट रहे हैं। इस बदलते रूझान से शिक्षा क्षेत्र में कई सवाल उठ रहे हैं कि किन कारणों से इतना बड़ा प्रतिशत विद्यार्थी विदेश जाना बंद कर रहे हैं और वे आगे की पढ़ाई के लिए किन विकल्पों को चुन रहे हैं।

विदेश में उच्च शिक्षा के लिए भारतीय छात्रों की रुचि पिछले दशकों में निरंतर बढ़ रही थी, लेकिन हाल के वर्षों में विदेशी शिक्षा के प्रति उनकी प्राथमिकताएं बदल रही हैं। कोविड-19 महामारी, आर्थिक अनिश्चितता, वीज़ा नीतियों में सख्ती और बढ़ती शिक्षा लागत इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

अध्ययन बताते हैं कि विदेशी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में फीस और जीवनयापन की महंगाई के कारण कई छात्रों का बजट प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, कुछ देशों में वीज़ा नियमों में कड़े परिवर्तन और काम करने की सीमित अनुमति ने भी छात्रों को हतोत्साहित किया है।

इसके विपरीत, भारतीय छात्रों अब घरेलू उच्च शिक्षा संस्थानों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जहां गुणवत्ता बेहतर हो रही है और कई तकनीकी व अनुसंधान आधारित पाठ्यक्रम विशेषज्ञता के साथ उपलब्ध हैं। इसके अलावा, छात्र संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक गंतव्यों के अलावा यूरोप, सिंगापुर एवं न्यूजीलैंड जैसे विविध और अधिक वाजिब लागत वाले विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।

शिक्षाविदों का मानना है कि भारत में शिक्षा के स्तर में सुधार और विश्वस्तरीय शिक्षा विकल्पों की बढ़ती संख्या छात्रों के घरेलू शिक्षा विकल्पों को अपनाने को प्रेरित कर रही है। साथ ही, ऑनलाइन और हाइब्रिड शिक्षा मॉडल ने भी विदेश जाने की आवश्यकता को कम किया है।

इसके बावजूद, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और बेहतर करियर अवसरों की चाह विदेशी शिक्षा के महत्व को खत्म नहीं करती। इसलिए, नीतिगत स्तर पर आवश्यक सुधार और विद्यार्थियों के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि वे अपनी शिक्षा की आकांक्षाओं को पूरा कर सकें।

अंत में, यह स्पष्ट है कि भारतीय छात्रों के शैक्षिक विकल्प अब और अधिक विविध और जटिल हो गए हैं, जहां वे न केवल देश-विदेश के पाठ्यक्रमों को परख रहे हैं बल्कि अपनी आर्थिक, सामाजिक और भविष्य की ज़रूरतों के अनुसार सूझ-बूझ से निर्णय ले रहे हैं। यही वजह है कि 43% छात्र विदेश जाने से हतोत्साहित होकर नए विकल्प खोज रहे हैं।

Source