दिल्ली के आदिवासियों के अधिकारों के लिए केंद्रीय जनजाति मंत्री ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा
नई दिल्ली (आधुनिक इंडिया ब्यूरो) केन्द्रीय जनजाति मंत्री जुएल ओराम ने दिल्ली में निवासरत वंचित आदिवासियों को उनका हक और अधिकार दिलाने के लिए सराहनीय कदम उठाए हैं।
आपको बताते चलें बीते दिनों दिल्ली आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष तोताराम भील के नेतृत्व में दिल्ली आदिवासी विकास परिषद एवं अन्य आदिवासी संगठनों की पंद्रह सदस्यीय टीम दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात कर दिल्ली में निवासरत वंचित आदिवासी समाज के कल्याण और अधिकारों की मांग रखी थी ।

गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने उन सभी मांगो को यह कहकर ठुकरा दीं क्योंकि दिल्ली में आदिवासी समाज को सेंसेस में अब तक शामिल नहीं किया गया है, जिसके कारण दिल्ली में आदिवासियों की संख्या शुन्य है। जबकि दिल्ली के अंदर कुल आबादी का 10 % आबादी आदिवासी समुदायों का है इसका उल्लेख भूरिया कमीशन रिपोर्ट में दर्ज है। आज दिल्ली की कुल आबादी लगभग 3.5 करोड़ है, इस प्रकार से अगर 10% के हिसाब से आंकड़ा निकाला जाए तो दिल्ली के अंदर लगभग 35 लाख आदिवासी समुदाय निवास करते हैं।
बड़ी दुख के साथ कहना पड़ रहा है आज देश को आजाद हुए 78 साल बीत चुके हैं पर आज भी आदिवासी समाज अपने हक और अधिकारों को पाने के लिए सदियों से संघर्ष करते आ रही है। देश में आज बतौर महामहिम राष्ट्रपति के पद पर आदिवासी समाज की बेटी बैठी हैं यह समस्त आदिवासी समाज के लिए गर्व का विषय है और ऐसे में दिल्ली के अंदर आदिवासी समाज अपने हक और अधिकारों से वंचित रहना पड़े यह बहुत दुखद विषय है।
उपरोक्त समस्याओं को लेकर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र भेजकर कहा है कि मुझे अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष तोता राम का पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें बिरसा मुंडा आदिवासी भवन के निर्माण तथा दिल्ली में आदिवासियों के समक्ष आ रही अन्य कठिनाइयों के बारे में बताया गया है। अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद अनुसूचित जाति के समक्ष आ रही कठिनाइयों के समाधान के लिए समर्पित है। मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए”।
इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए समस्त आदिवासी समाज केंद्रीय जनजाति मंत्री जुएल ओराम का आभार व्यक्त करती है।
