ट्रम्प पर भरोसा करें, घबराने वालों पर नहीं: ‘रियल रीप Opening’ के बाद डोनाल्ड ने खुद को ‘शांति के राष्ट्रपति’ के रूप में पेश किया
न्यूयॉर्क, न्यूयॉर्क
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खुद को “शांति का राष्ट्रपति” घोषित किया है। ट्रम्प का दावा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में आठ युद्धों को समाप्त किया है और पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। इस बीच, उन्होंने ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की है यदि मौजूदा वार्ताएं विफल रहती हैं।
ट्रम्प ने हाल ही में जलडमरूमध्य हॉर्मुज़ के पुनः खुलने के बाद अपनी छवि को मजबूत करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में शांति की ओर प्रगति हुई है, जिसमें इज़राइल और लेबनान के बीच एक संभावित युद्धविराम शामिल है। हालांकि, इस क्षेत्र में तनाव पूरी तरह कम नहीं हुआ है, क्योंकि ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर कई दावों का खंडन किया है।
पूर्व राष्ट्रपति ने इस स्थिति का उपयोग करते हुए अपनी विदेश नीति की उपलब्धियों को रेखांकित किया है और दावा किया है कि उन्होंने क्षेत्रीय संघर्षों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, अमेरिका की कूटनीति के कारण कई लंबित युद्धों को समाप्त किया गया और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयास तेज हुए।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने ट्रम्प के दावों पर संदेह व्यक्त किया है और कहा है कि कुछ संघर्ष अभी भी जटिल और पुरानी राजनीतिक परिस्थितियों के कारण सक्रिय हैं। ईरान सहित कई देशों ने ट्रम्प की सैन्य चेतावनियों को भी गंभीरता से नहीं लिया है, लेकिन अमेरिका की ओर से लगातार कड़े कदम उठाने की संभावना बनी हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम में ट्रम्प ने खुद को राजनीतिक रूप से पुनर्जीवित करने की कोशिश की है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए। उनका ‘शांति राष्ट्रपति’ का चेहरा पेश करना उनकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोजिशनिंग पश्चिम एशियाई संघर्षों के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक संकेत हो सकती है, लेकिन अस्थिरता बनी रहने की पूरी संभावना है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस क्षेत्र में आगे की कूटनीतिक गतिविधियों और सैन्य फैसलों पर बनी हुई हैं।
ट्रम्प ने इस दौरान यह भी कहा कि अमेरिका क्षेत्र की स्थिरता के लिए तैयार है और अगर जरूरत पड़ी तो सैन्य बल का इस्तेमाल भी करेगा। हालांकि, सभी पक्षों से आग्रह किया गया है कि वे शांतिपूर्ण वार्ताओं को प्राथमिकता दें।
