CET सेल कड़े नियमों के बाद राज्य NRI कोटा में दाखिले में 92% गिरावट

After CET cell tighten rules, state NRI quota admissions drop by 92%

मुंबई, महाराष्ट्र

राज्य में CET सेल द्वारा नियमों को कड़ा करने के बाद NRI कोटा के तहत दाखिले में भारी गिरावट देखी गई है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष NRI कोटा के तहत कॉलेजों में प्रवेश लगभग 92% तक कम हो गया है। विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि नए नियमों ने प्रवेश प्रक्रिया को काफी जटिल बना दिया है, जिससे NRI छात्र और उनके अभिभावक परेशानी में हैं।

CET सेल ने प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और फर्जी दाखिलों को रोकने के उद्देश्य से कई संशोधन किए हैं। इनमें कागजात की कड़ी जांच, आवेदन प्रक्रिया में बदलाव और फीस भुगतान के नियमों में सख्ताई शामिल है। सभी बदलावों का उद्देश्य बेईमानी और गलत दस्तावेजों के उपयोग को रोकना है, लेकिन इसका प्रभाव यह हुआ है कि NRI छात्र अब पहले की तुलना में कम संख्या में आवेदन कर रहे हैं।

शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमारे द्वारा लागू किए गए नए नियम को लगभग सभी संस्थान मानते हैं, क्योंकि इससे प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। हालांकि, हमें समझना होगा कि इससे कुछ छात्रों को सांझौता करना पड़ सकता है।” वहीं, NRI छात्रों के अभिभावक भी इस स्थिति से चिंतित हैं और उम्मीद करते हैं कि नियमों को थोड़ा संशोधित किया जाए ताकि योग्य छात्र प्रभावित न हों।

विशेषज्ञों के अनुसार, NRI कोटा के तहत दाखिले में 92% की गिरावट का सीधा प्रभाव उन परिवारों पर पड़ा है, जो भारत में उच्च शिक्षा के लिए अपने बच्चों को भेजते हैं। कई अभिभावक अब वैकल्पिक विकल्पों की तलाश में हैं या अपने बच्चों को विदेश में ही पढ़ाई के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस परिस्थिति ने स्थानीय एजेंसियों और कंसल्टेंटों के कारोबार को भी प्रभावित किया है।

कुछ शिक्षाविदों का सुझाव है कि नियमों में सुधार करते हुए उनको इतना सख्त नहीं बनाना चाहिए कि वे छात्रों के अधिकारों को प्रभावित करें। उन्होंने कहा कि एक संतुलन बनाना आवश्यक है ताकि देश की शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता बनी रहे और साथ ही योग्य NRI छात्र भी उचित अवसर प्राप्त कर सकें।

राज्य सरकार और CET सेल इस मुद्दे पर लगातार समीक्षा कर रहे हैं और आगामी समय में संभावित सुधारों पर विचार कर सकते हैं, ताकि दोनों पक्षों के हितों का संरक्षण किया जा सके। फिलहाल, शिक्षा जगत में यह विषय गरमाहट बनाए हुए है और सभी की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

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