रूस भारत को ऊर्जा आपूर्ति पर सभी समझौतों को पूरा करेगा: वित्त मंत्री लावरोव
नई दिल्ली, भारत
भारत और रूस के संबंधों को ‘हिंदी-रूसी भाई भाई’ के रूप में वर्णित करते हुए, रूस के वित्त मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि यह केवल एक नारा नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक समझ का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच रिश्ते गहरे और ऐतिहासिक हैं, जो समय के साथ और भी मजबूत होते जा रहे हैं।
लावरोव ने कहा, “यह सिर्फ एक मजाकिया नारा नहीं है, बल्कि यह हमारे बीच गहरे मेल और अपनत्व की भावना को दर्शाता है। भारत और रूस का रिश्ता सिर्फ राजनीतिक या आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक और सांस्कृतिक बंधन भी है।”
उन्होंने यह भी बताया कि रूस भारत को ऊर्जा आपूर्ति के संबंध में सभी समझौतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग कई वर्षों से चल रहा है और यह संबंध वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने में सहायक साबित हो रहा है। वित्त मंत्री लावरोव ने यह भी कहा कि रूस ने भारत के साथ ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति के मामलों में मजबूत भागीदारी निभाई है और आगे भी यह जारी रहेगा।
भारत और रूस ने ऊर्जा क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा, तेल, प्राकृतिक गैस, और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई समझौते किए हैं। दोनों देशों ने मिलकर ऊर्जा बाजार में नई संभावनाएं तलाशने और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई पहलें की हैं। यह समझौते न केवल दोनों देशों की आर्थिक प्रगति में सहायक हैं, बल्कि यह क्षेत्रीय और वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदी-रूसी भाई भाई का यह नाता दोनों देशों के बीच स्थिर और भरोसेमंद साझेदारी का प्रतीक है। इसके कारण विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बेहतर होता है और दोनों देशों को सामरिक, आर्थिक तथा तकनीकी लाभ प्राप्त होते हैं।
लावरोव ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और रूस के बीच मजबूत सहयोग दोनों के लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर विश्वास और भरोसे के साथ आगे बढ़ना दोनों देशों के रणनीतिक हितों में है।
इस अनोखे और विशेष रिश्ते के कारण, भारत-रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले समझौते और परियोजनाएं नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकती हैं, जिससे दोनों देशों की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी और आर्थिक समृद्धि संभव होगी।
इस तरह, ‘हिंदी-रूसी भाई भाई’ का नारा केवल शब्दों में ही नहीं बल्कि क्रियाकलापों और वास्तविकता में भी झलकता है, जिससे दोनों देशों का मेल और भी गहरा होता जा रहा है।
