अमेरिका ने ईरान की सैन्य तेल बिक्री पर नए प्रतिबंध लगाए: ट्रेजरी
वॉशिंगटन, अमेरिका – अमेरिका ने ईरान की सैन्य तेल बिक्री पर ताजा प्रतिबंध लगाए हैं। इसमें अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ओमान को भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह हॉर्मूज जलसंधि में टोल के संचालन में किसी भी प्रकार की सहायता न करें।
ट्रेजरी विभाग ने कहा है कि इस कदम का मकसद ईरान की सैन्य गतिविधियों को वित्तीय मदद पहुँचाने से रोकना है। ईरान पर यह आरोप है कि वह अपनी सैनिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए तेल बिक्री से होने वाली आय का इस्तेमाल करता है। अमेरिका ने इस बार का प्रतिबंध विशेष रूप से ईरान की सैन्य शाखा की तेल बिक्री से जुड़े कारोबार को निशाना बनाया है।
स्कॉट बेसेंट ने अपनी चेतावनी में कहा कि हॉर्मूज जलसंधि वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस क्षेत्र में किसी भी बाधा को वह गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने ओमान को स्पष्ट किया कि अगर वह इस क्षेत्र में टोल के प्रबंधन या समन्वय में शामिल होता है तो उसे भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
हॉर्मूज जलसंधि से दुनिया का लगभग एक तिहाई तेल गुजरता है, इसलिए इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में एक संवेदनशील जगह माना जाता है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ईरान इस मार्ग का उपयोग अपने सैन्य और राजनीतिक हितों के लिए कर रहा है, जो वैश्विक स्थिरता के लिए खतरे की ओर इशारा करता है।
ईरान सरकार ने अभी तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, इससे पहले भी ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को नकारते हुए कहा था कि ये कदम क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने के लिए उठाए गए हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी प्रतिबंधों से ईरान की सैन्य फंडिंग पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन इससे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव बढ़ने की भी संभावना है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा यह रणनीति ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयासों का हिस्सा है।
यह नई आर्थिक पाबंदियां अमेरिका की उस व्यापक नीति का हिस्सा हैं, जिसमें वह ईरान के核 कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को नियंत्रित करना चाहता है। ट्रेजरी विभाग ने जारी बयान में कहा कि वे इन प्रतिबंधों को कठोरता से लागू करेंगे और किसी भी मामले में कानून का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस कदम की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कुछ देश अमेरिका के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानते हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा यह दबाव कायम रहता है तो ईरान को अपनी तेल बिक्री के वैकल्पिक मार्गों और साझेदारों की तलाश करनी पड़ सकती है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में फेरबदल हो सकता है।
इस पूरी परिस्थिति पर नजर बनाए रखना अनिवार्य है क्योंकि क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
