एनएसए अजीत डोवाल और रूसी राष्ट्रपति सलाहकार पातрушेव ने समुद्री एवं रक्षा सहयोग पर समीक्षा की
नई दिल्ली, भारत – राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और रूसी राष्ट्रपति के सलाहकार निकोलाई पातрушेव ने हाल ही में दिल्ली में समुद्री और रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत की। दोनों अधिकारियों ने नवंबर 2025 में पातрушेव के नई दिल्ली दौरे के दौरान प्रस्तावित कई पहलुओं की समीक्षा की और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
इस वार्ता का मुख्य फोकस समुद्री कनेक्टिविटी को बढ़ाने, जहाज निर्माण में सहयोग, रक्षा क्षेत्र की साझेदारी और ध्रुवीय जल क्षेत्रों में नौसैनिक संचालन के लिए नाविकों के प्रशिक्षण को विस्तारित करने पर था। पातрушेव की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नयापन देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोवाल ने इस अवसर पर कहा कि “भारत और रूस के बीच समुद्री और रक्षा सहयोग पहले से ही गहरे स्तर पर है, लेकिन हम चाहते हैं कि इस सहयोग को नई तकनीकी उन्नतियों और सामरिक रणनीतियों से और भी बेहतर बनाया जाए।” उन्होंने कहा कि ध्रुवीय जल क्षेत्रों में नौसैनिक क्षमता का विकास दोनों देशों के लिए सामरिक महत्व रखता है और इस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
रूसी सलाहकार पातрушेव ने भी इस सहयोग को लेकर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय और नियमित वार्ता से समुद्री सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति होगी। उन्होंने जहाज निर्माण और समुद्री कनेक्टिविटी के क्षेत्र में साझा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
द्विपक्षीय बैठक में दोनों पक्षों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए एक संयुक्त ढांचे के विकास पर भी चर्चा की। इसके साथ ही, ग्लोबल और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में भी विचार-विमर्श हुआ, जिसमें साइबर सुरक्षा और रणनीतिक संचार के क्षेत्र में सहयोग को प्राथमिकता दी गई।
विशेष रूप से, पातрушेव ने ध्रुवीय जल क्षेत्रों में नौसैनिक अभियानों के लिए प्रशिक्षित नाविकों के आदान-प्रदान की पहल पर जोर दिया, जिससे दोनों देशों की समुद्री ताकत में वृद्धि हो सके। इसके अतिरिक्त, जहाज निर्माण के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों को अपनाने और साझा अनुसंधान को प्रोत्साहित करने पर भी सहमति हुई।
यह बैठक भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूती प्रदान करने और समुद्री तथा रक्षा क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयां देने के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। दोनों पक्ष इस दिशा में निरंतर संवाद और सहयोग जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
