अंडमान की अपार संभावनाओं को Unlock कर क्षेत्रीय साझेदारी में वृद्धि करें: थाईलैंड के दूत
नई दिल्ली, भारत – थाईलैंड की राजदूत सिरिपोर्न टांटिपन्यातेप ने अंडमान द्वीप समूह की अपार संभावनाओं को उजागर कर उसे क्षेत्रीय विकास के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि पर्यटन और व्यापार सहयोग के माध्यम से अंडमान को एक सामरिक और आर्थिक हब में बदलना चाहिए, जिससे दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच बेहतर साझेदारी स्थापित हो सके।
राजदूत सिरिपोर्न ने उल्लेख किया कि अंडमान द्वीप समूह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और रणनीतिक स्थान के कारण एक अनूठा अवसर प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा, “अंडमान के समुद्री संसाधन, पर्यटन स्थल और परिचालन क्षमता को पूरी तरह से विकसित किया जाना चाहिए। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी गति मिलेगी।”
थाईलैंड की सरकार ने क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अंडमान में निवेश बढ़ाने की इच्छा जताई है। उन्होंने प्रस्तावित किया कि पर्यटन और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में साझेदारी कर एक स्थायी मॉडल तैयार किया जाए जो दोनों देशों के आर्थिक हितों को सशक्त करे।
सिरिपोर्न टांटिपन्यातेप ने बताया कि कोरोनाकाल के बाद यात्रा और व्यापार गतिविधियों में तेजी आ रही है, और इस अवसर का सदुपयोग करते हुए अंडमान को बेहतर अवसंरचना और सुविधा केंद्र बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि थाईलैंड भारत के साथ टूरिज्म प्रमोशन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को क्षेत्रीय आर्थिक विकास में एक केन्द्रीय भूमिका निभानी चाहिए। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को जरूरी सुविधाएं, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए तेजी से विकास योजनाएं लागू करनी होंगी।
इस पहल से दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सहयोग को नया आयाम मिलेगा, जिससे समग्र क्षेत्र को लाभ होगा।
