मणिपुर में बर्न स्वैलो ने शायद त्याग दी है प्रवासी प्रवृत्ति

Barn swallows in Manipur may have shed migratory trait

मणिपुर, भारत – पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर में बर्न स्वैलोज (Barn Swallows) की प्रवासन प्रवृत्ति को लेकर एक नई अध्ययन ने परंपरागत धारणाओं को चुनौती दी है। यह अध्ययन उन पक्षियों के व्यवहार और उनके आवास पैटर्न पर केंद्रित है, जिन्हें पहले ठंडे उत्तरी क्षेत्र से सादे मौसम में यहाँ आने वाला समझा जाता था।

बर्न स्वैलोज, जो अपने विशिष्ट खोखले और चूहे जैसा पूंछ के कारण पहचाने जाते हैं, सामान्य रूप से प्रवासी पक्षी माने जाते हैं। लेकिन हाल के डॉक्यूमेंटेशन और डेटा विश्लेषण से पता चला है कि मणिपुर के कुछ हिस्सों में ये पक्षी प्रवासी प्रवृत्ति छोड़कर अब स्थायी रूप से बस रहे हैं। यह रिसर्च लोकल पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण समझी जा रही है।

इस अध्ययन में स्थानीय पक्षी विशेषज्ञों ने लगभग दो वर्षों तक बर्न स्वैलो की गतिविधियों पर नज़र रखी। उनके निष्कर्ष बताते हैं कि इस क्षेत्र में इन पक्षियों ने घोंसले बनाने, खाने की आदतों और सामाजिक व्यवहार में बदलाव दिखाया है। इससे स्पष्ट है कि ये पक्षी अब पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार अपने व्यवहार को ढाल रहे हैं और संभवतः प्रवासन की ज़रूरत को कम कर रहे हैं।

ग्रह-तत्वों के अध्ययन और मौसम की स्थिति के विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मणिपुर सहित पूर्वोत्तर भारत में तापमान के मध्यम स्तर और वर्षा के पैटर्न में बदलाव बर्न स्वैलो के प्रवासन की परंपरा को प्रभावित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान और स्थायी भोजन उपलब्धता ने पक्षियों को एक ही जगह रहकर अनुकूलन की संभावना बढ़ा दी है।

पर्यावरणविद् डॉ. राधिका सेन ने कहा, “यह परिवर्तन न केवल पक्षियों के लिए बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए संकेत हो सकता है कि जलवायु परिवर्तन और मानव हस्तक्षेप जैव विविधता पर किस हद तक प्रभाव डाल रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में ऐसे अध्ययन और व्यापक किए जाने चाहिए ताकि स्थानीय और राष्ट्रीय पक्षी संरक्षण नीतियां और बेहतर बनाई जाएं।

स्थानीय वन विभाग और पक्षी संरक्षण संस्थान ने भी इस शोध को स्वागत किया है और बताया कि वे आगामी योजनाओं में इस नए जानकारी का समावेश करते हुए पक्षियों के आवास संरक्षण पर विशेष ध्यान देंगे। इस तरह के शोध पूर्वोत्तर भारत के जैविक विविधता में हो रहे परिवर्तनों को समझने में मदद करते हैं और संरक्षण कार्यों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

इस नई जानकारी के बाद मणिपुर में पक्षी प्रेमी और वैज्ञानिक बर्न स्वैलो के व्यवहार को और करीब से निगरानी में रखेंगे ताकि वातावरणीय बदलावों के प्रभावों को और स्पष्ट किया जा सके।

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