कांग्रेस और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाए यूपी संस्कृति विभाग के आरटीआई अनुरोधों पर ‘मौन’ पर सवाल
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग पर कांग्रेस नेता आलम ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि विभाग द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) अनुरोधों का जवाब देने में देरी की जा रही है और कई बार तो मुख्य सचिव कार्यालय के प्रेषित अनुरोधों का भी जवाब नहीं दिया जा रहा है। इस व्यवहार से स्पष्ट होता है कि संस्कृति विभाग जानकारी को छुपाने की कोशिश कर रहा है।
आलम ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने कई बार विभाग को पत्र भेजकर सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ी जानकारियां मांगी थीं, लेकिन विभाग की ओर से न तो समय पर जवाब मिला और न ही पूरी जानकारी साझा की गई। उन्होंने इसे सूचना छुपाने और जनता से गुप्त रखने की नीति बताया।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले में आवाज उठाई है और कहा है कि ऐसी गैरजिम्मेदाराना रवैया शासन में पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह सूचना के अधिकार के नियमों का पालन सुनिश्चित करे और जनता को सही समय पर जानकारी प्रदान करे।
सूचना के अधिकार कानून का उद्देश्य ही है कि प्रशासन में पारदर्शिता लाई जाए और जनता के सामने सरकारी खर्चों की पूरी जानकारी हो, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। ऐसे में संस्कृति विभाग का यह रवैया सवालों के घेरे में है।
सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग ने देरी के पीछे विभिन्न तकनीकी एवं प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया है, लेकिन विपक्षी दल इसे एक बहाना मानते हैं। आलम का कहना है कि यदि विभाग जवाब देने में सक्षम नहीं है तो उसे सार्वजनिक धन के उपयोग की पूरी जानकारी अपलोड करनी चाहिए ताकि जनता स्वयं देख सके।
उत्तर प्रदेश में संस्कृति विभाग के कार्यों की जांच और जवाबदेही को लेकर यह मामला राजनीतिक तापमान बढ़ाने वाला है। आगामी दिनों में कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों के द्वार सक्रियता बढ़ाने की संभावना है।
इस पूरे मामले में जनता का हित है कि विभाग पारदर्शिता बरतते हुए आगे बढ़े और सूचना अधिकार का सम्मान करते हुए सभी आवश्यक जानकारियां समय पर उपलब्ध कराए। तभी प्रदेश के विकास और प्रशासनिक कार्यों पर जनता का विश्वास बना रहेगा।
