भारत कार्यस्थल एआई अपनाने में वैश्विक नेता के रूप में उभरा: ADP रिसर्च

India emerges as a global leader in workplace AI adoption: ADP Research

नई दिल्ली, भारत

भारत कार्यस्थल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है। एक हालिया अध्ययन में पता चला है कि भारत में 41% कर्मचारी AI का दैनिक आधार पर उपयोग करते हैं, जो इस क्षेत्र में देश की तेजी से बढ़ती स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, इस विकास के बावजूद, एक दिलचस्प और पेचीदा स्थिति सामने आई है जिसे विशेषज्ञ ‘उत्पादकता विरोधाभास’ कह रहे हैं।

बताया गया है कि जबकि AI का नियमित उपयोग काम को आसान और तेज़ बनाने में मदद करता है, फिर भी अधिकांश दैनिक उपयोग करने वाले कर्मचारी खुद को कम उत्पादक महसूस कर रहे हैं। यह निष्कर्ष ADP इंडिया के राहुल गोयल ने साझा किया, जो इस क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि AI के साथ तालमेल बैठाते हुए कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाना केवल तकनीक अपनाने का विषय नहीं है, बल्कि इसमें मानव कौशल और अनुकूलता की भी प्रमुख भूमिका होती है।

राहुल गोयल ने स्पष्ट किया कि कंपनियों को अपनी परिभाषा और मापन के तरीकों को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता है। सिर्फ कार्य समाप्त करने की संख्या से उत्पादकता को न मापा जाए, बल्कि कर्मचारियों की आत्मविश्वास, समस्या-समाधान क्षमता और नई परिस्थितियों को अपनाने की योग्यता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI एक उपकरण मात्र है और इसे सही दिशा में प्रयोग करने के लिए मानव प्रतिभा और सोच की जरूरत होती है।

इसके अलावा, अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया कि कई कर्मचारियों को AI के साथ काम करते हुए अभिव्यक्ति, रचनात्मकता और निर्णय लेने के स्वतंत्रता में कमी महसूस होती है, जिससे उनका मनोबल प्रभावित हो सकता है। इसलिए, संगठनात्मक संरचनाओं और कार्य संस्कृति में परिवर्तन लाना भी जरूरी हो जाता है ताकि AI का सम्मानजनक और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI और मानव कार्यबल के बीच बेहतर तालमेल बैठाने के लिए प्रशिक्षण, संवाद और तकनीकी सहायता पर विशेष ध्यान देना होगा। इससे न केवल कर्मचारियों की उत्पादकता में सुधार होगा, बल्कि वे अपने काम में अधिक संतुष्टि और आत्मविश्वास का अनुभव कर सकेंगे।

इस प्रकार, भारत AI उपयोग के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसका पूर्ण लाभ तभी मिलेगा जब तकनीक और मानव कौशल के बीच सही संतुलन स्थापित किया जाएगा। यह कदम भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी मजबूती प्रदान करेगा और आधुनिक कार्यस्थलों में विकास का नया अध्याय खोलेगा।

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